‘मारिजुआना’ शब्द की उत्पत्ति और क्यों इसे नस्लभेद से जोड़ा जाता है
- 1. 1937: एक ऐतिहासिक मोड़
- 2. क्या इसका मतलब है कि हमें 'मारिजुआना' शब्द का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए?
- 3. निष्कर्ष
पिछले कुछ दशकों में व्यापक आम जनता के बीच भांग और इसे पीने वालों के प्रति रवैये में सकारात्मक बदलाव आया है, लेकिन सौ साल भी पीछे देखें तो साफ दिखाई देता है कि निषेधवादियों ने बड़े समुदाय को नस्लवादी और बाहरी लोगों के प्रति नफरत की प्रवृत्ति अपनाने के लिए कैसे प्रेरित किया।
ऐसे ही सोचिए, आपको भांग के पौधे को दर्शाने वाले कितने नाम याद हैं? वीड, गांजा, पॉट, घास, क्रोन, बड, स्टिकी-इकी, मैरी जेन… यह सूची खत्म ही नहीं होती, और हर राज्य व देश में बदलती रहती है। “मारिजुआना” शब्द हमारे पसंदीदा पौधे के लिए सबसे पुराने स्लैंग में से एक है, लेकिन इसके पश्चिमी संस्कृति में व्यापक इस्तेमाल के पीछे की कहानी शायद सबसे जानकार उपभोक्ता को भी चौंका दे।
1900 के शुरुआती दशक में मेक्सिको से बड़ी संख्या में लोग अमेरिका पहुंचे, जिसका मुख्य कारण सीमा पार चल रही क्रांति (20 नवम्बर 1910 – 5 फरवरी 1917) थी। इस बड़े पैमाने की क्रांति के चलते फेडरल मेक्सिकन सेना को खत्म कर क्रांतिकारी सेना बनाई गई और मेक्सिकन संस्कृति व सरकार में बड़े बदलाव हुए। पर इस अस्थिरता और सामान्य नागरिकों पर अत्याचार के चलते बड़ी आबादी को अमेरिका प्रवास के लिए मजबूर होना पड़ा।

आज के समाज में भी, बड़े पैमाने पर आव्रजन राष्ट्रवादी भावना को उभरने का मौका देता है, तो समझना आसान है कि 1900 के दशक की शुरुआत में इसे कैसे देखा गया होगा। अमेरिका में पहले से ही विरोधी भावनाएं प्रबल थीं और सत्ता में बैठे लोगों ने इन्हें और हवा दी। याद रखें, यह वह समय था जब औषधीय उपयोग के अतिरिक्त भांग का उपयोग बहुत ही कम था, और भांग के सकारात्मक पहलुओं की जानकारी गोरे लोगों को लगभग नहीं थी।
यहीं प्रवेश होता है हमारे नायक, हैरी एंसलिंगर का — जो फेडरल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (वर्तमान DEA के पूर्वज) के कमिश्नर और आजीवन नस्लवादी थे। श्री एंसलिंगर के अपने समाज के बाहर की संस्कृतियों के प्रति विचार बेहद सख्त थे, और किसी भी नशे के प्रति और भी कट्टर। प्रचार के माहिर, भले ही उन्होंने अमेरिका में भांग पर प्रतिबंध लगाना शुरू न किया हो (यह 1860 से न्यूयॉर्क में देखा जा सकता है), लेकिन 1930 में उन्होंने इसकी कमान पूरी तरह संभाल ली। उन्हें इन कथनों के लिए जाना जाता है:
- "मारिजुआना मानव इतिहास की सबसे हिंसकता फैलाने वाली ड्रग है"
- "अमेरिका में कुल 1,00,000 मारिजुआना पीने वाले हैं, जिनमें से अधिकांश नीग्रोज़, हिस्पैनिक, फिलिपीनो और कलाकार हैं। इनकी शैतानी म्यूजिक, जैज़ और स्विंग मारिजुआना के कारण है। यह मारिजुआना श्वेत महिलाओं को नीग्रोज़, कलाकारों और अन्य से यौन संबंध बनाने के लिए उकसाता है।"
- "मारिजुआना को गैरकानूनी ठहराने का मुख्य कारण इसका अपवित्र नस्लों पर प्रभाव है।"
ये उद्धरण स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि वे भांग उपयोगकर्ताओं और श्वेत नस्ल के बाहर के लोगों के प्रति कितनी घृणा रखते थे और साथ ही उस व्यक्ति की मानसिकता झलकती है, जो उस समय ड्रग नियंत्रण एजेंसी का मुखिया था। वे इतने अधिक नस्लवादी थे कि 1920 के दशक में भी उन्हें "पागल नस्लवादी" माना जाता था, जब नस्लभेद आम और स्वीकृत था।
1937: एक ऐतिहासिक मोड़
1937 का मैरिजुआना टैक्स एक्ट वह बिंदु था जब भांग को लेकर भ्रम और झूठ आम लोगों की चेतना में गहराने लगे, और यह सब नाम से ही शुरू हुआ। देखिए, इससे पहले तक अमेरिका में भांग को आम तौर पर मारिजुआना नहीं कहा जाता था। एंसलिंगर ने इस शब्द से जनता की पहले से मौजूद आशंकाओं को भड़काया, जिससे यह एक विदेशी पदार्थ जैसा दिखाया गया जिसका प्रयोग मुख्य रूप से मैक्सिकन (और अश्वेत) करते हैं। भांग का नाम बदलकर मारिजुआना रखने और इसे 'विदेशी' रंग देने से वे अपने नफरत अभियान के लिए भी उनका समर्थन जुटा सके जिन्होंने अन्यथा इस ओर धयान नहीं दिया होता। यह रणनीति इतिहास में कई बार इस्तेमाल हुई है और आज भी आम है।

हैरी जे. एंसलिंगर ने एक और बड़ी चाल चली — मास मीडिया को अपने निजी मंच के तौर पर इस्तेमाल किया। प्रकाशक विलियम रैंडोल्फ हर्स्ट के समर्थन से, एंसलिंगर ने “Gore Files” नाम की अपनी एक मुहिम चलाई। ये कहानियां पूरे अमेरिका में प्रसारित होती थीं और उनकी अपने राज्य से फैली विरोधी भांग भावना को देश भर में फैला देती थीं। रिपोर्ट्स से कुछ हिस्से तोड़कर इन्हें ऐसे प्रकाशित किया जाता कि सब अपराध ‘Reefer Madness’ की हालत में केवल भांग पीने वाले करते हैं। यही शब्द 1937 की बदनाम फिल्म का शीर्षक भी बना, जिसने भांग उपयोगकर्ता की छवि बदलने में अहम भूमिका निभाई।
भांग पर प्रतिबंध हमेशा ही रंगीन और अल्पसंख्यक समुदाय को disproportionate नुकसान पहुंचाता रहा है, और इसमें कोई संदेह नहीं कि जब इसे मुख्यधारा में लाया गया तब ऐसी ही रणनीति अपनाई गई थी। इस पौधे का इतिहास और इसके अपराधीकरण के रास्ते को समझना बहुत जरूरी है, क्योंकि अब भी हम निषेध खत्म करने की लड़ाई जारी रखे हुए हैं।
क्या इसका मतलब है कि हमें 'मारिजुआना' शब्द का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए?
नहीं, बिल्कुल नहीं। “मारिजुआना” शब्द सदियों से इस्तेमाल हो रहा है और आगे भी रहेगा। लेकिन जरूरी है कि हम इसके पीछे की कहानी को समझें। अब इसका अर्थ यह है कि हम सब इस पौधे के बारे में अधिक शिक्षित हों, और जब भांग की चर्चा करें तो उसके लिए और अधिक सटीक व विशिष्ट शब्दावली use करें। इस बदलाव की शुरुआत हो चुकी है — “कैनेबिस” शब्द अब भांग के साइकोएक्टिव पौधे के लिए और “हेम्प” शब्द नॉन-साइकोएक्टिव पौधे के लिए फैल रहा है।

हमें ‘मारिजुआना’ शब्द इस्तेमाल करने में आने वाले नस्लीय संकेतों के प्रति भी सतर्क रहना चाहिए। यह समझना जरूरी है कि इस पौधे का इतिहास हमेशा नस्ल के साथ जुड़ा रहा है और हमारी भाषा इस कारण की मदद या हानि कर सकती है। तो आइए शुरू करें। जब हम विभिन्न कैनाबिनॉयड्स की बात करें जैसे THC, CBN, या CBD, तो इनके सही नामों का इस्तेमाल करें। अधिक सटीक शब्दावली से हम भांग से जुड़े कई पुराने भ्रम व मिथकों को दूर कर सकते हैं।
2. निष्कर्ष
तो लीजिए, ये थी मारिजुआना शब्द की उत्पत्ति और इसका नस्लवाद से अटल रिश्ता। अगली बार कोई बोले कि भांग ‘गेटवे’ ड्रग है या इसका हिंसा से कोई संबंध है (जो शुक्र है आजकल बहुत कम सुनते हैं), तो बस इस शब्द का इतिहास याद करिए कि कैसे इसका इस्तेमाल पूरे समुदाय को बदनाम करने के लिए किया गया। अगली बार आप किसी को 'मारिजुआना' शब्द इस्तेमाल करते सुनें, तो सही इतिहास साझा करने की सोचें। केवल दूसरों को शिक्षित कर के ही हम भांग और इसके उपयोगकर्ताओं की नकारात्मक छवि बदल सकते हैं।
भांग सच में दवा है, और हम बहुत भाग्यशाली हैं कि आज के समय में हम इसकी चर्चा कर सकते हैं — सिर्फ उपभोग नहीं, बल्कि औषधीय उपयोग तक!
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