कैनबिस पौधों के लिए फोलियर फीडिंग गाइड
- 1. फोलियर फीडिंग और फोलियर स्प्रेइंग क्या है?
- 2. फोलियर स्प्रे या फोलियर फीड करने का सबसे अच्छा समय कब है?
- 3. आपको कब फोलियर स्प्रे करना चाहिए
- 4. फोलियर स्प्रे के सीमित लाभ
- 5. कौन-सा स्प्रेयर इस्तेमाल करें?
- 6. घर पर बनाएं फोलियर स्प्रे रेसिपी
- 7. फोलियर स्प्रे की एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए टिप्स
- 8. पारंपरिक सिंचाई: विस्तार से
- 8. a. फोलियर फीडिंग vs पारंपरिक सिंचाई
- 8. b. समाधान: दोनों का संयोजन!
- 9. फोलियर फीडिंग शॉर्ट faqs
- 10. निष्कर्ष
फोलियर स्प्रेइंग से भ्रमित न हों, जो मूल रूप से वही है लेकिन किसी भी घोल के लिए प्रयोग किया जाता है जिसे स्प्रे किया जा सकता है। आमतौर पर इसका इस्तेमाल कीट-ग्रस्त पौधों पर कीटनाशक या फफूंदनाशक लगाने के लिए किया जाता है। फोलियर फीडिंग का मतलब है पौधों की पत्तियों पर सीधे पोषक तत्व वाले घोल को स्प्रे करके मैक्रो और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स देना, जिससे पत्तियां ज्यादा स्वस्थ होती हैं और पोषक तत्वों की कमी को जल्दी ठीक किया जा सकता है। कई ग्रोअर्स मानते हैं कि फोलियर फीडिंग आपके कैनबिस सीड्स को नियमित रूप से भूमि में खाद देने से बेहतर हो सकती है, लेकिन क्या यह सच है?
1. फोलियर फीडिंग और फोलियर स्प्रेइंग क्या है?
फोलियर फीडिंग में पोषक तत्व घोल को पत्तियों पर छिड़कना शामिल है, मिट्टी में पानी देने के बजाय। यह पोषक तत्वों की कमियों को जल्दी और प्रभावी ढंग से निपटाने का एक तरीका है, क्योंकि पत्तियां जड़ों की तुलना में पोषक तत्वों को कहीं तेज अवशोषित कर सकती हैं, भले ही यह उनके स्टोमाटा के आकार से सीमित हो। फोलियर फीडिंग 1950 के दशक में लोकप्रिय हुई जब मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह पाया कि पत्तियां अवशोषण का बहुत ही प्रभावी अंग हैं; हालाँकि वे सीमित मात्रा में ही पोषक अवशोषित कर सकती हैं, फिर भी यह तकनीक लगभग 95% क्षमता तक पहुँची।

वैज्ञानिकों की खोज के बावजूद, सभी ग्रोअर्स इससे सहमत नहीं हैं। वास्तव में, उत्पादकों ने पाया है कि अधिकांश फोलियर स्प्रे उत्पादों में घोल को पत्तियों पर टिका रखने के लिए सर्फेक्टेंट नहीं होता, जिससे पोषक घोल लगभग तुरंत की नीचे गिर जाता है और पत्तियां उचित अवशोषण नहीं कर पाती। इसके बजाय घोल भूमि में जाता है और फिर उसकी जड़ों द्वारा अवशोषित किया जाता है। इसका मतलब है कि फोलियर फीडिंग पोषक तत्वों की कमी से निपटने के लिए तो इस्तेमाल हो सकती है और कुछ बार इसकी मदद से पत्तियों को स्वस्थ बनाया जा सकता है, लेकिन इसे नियमित फीडिंग का विकल्प नहीं मानना चाहिए।
फोलियर स्प्रेइंग
फोलियर फीडिंग के अलावा, फोलियर स्प्रेइंग भी है जो मूल रूप से वही तरीका है, जिसका इस्तेमाल फफूंदनाशक या कीटनाशक लगाने के लिए किया जाता है, ताकि फफूंदी, कीट या बीमारियों से निपटा जा सके। इन दोनों में अंतर सिर्फ उनके उपयोग के उद्देश्य और लगाने की आवृत्ति में है; दोनों फोलियर स्प्रे ही हैं, फर्क सिर्फ यह है कि एक पोषक तत्वों के लिए और दूसरा कीट/फफूंदी हटाने के लिए।
2. फोलियर स्प्रे या फोलियर फीड करने का सबसे अच्छा समय कब है?
अगर आप बाहर ग्रो कर रहे हैं तो फोलियर स्प्रे या फीडिंग का सबसे बढ़िया समय सुबह जल्दी या शाम में देर से है, जब पौधे के छिद्र (स्टोमाटा) पूरी तरह खुले होते हैं। अगर आप इंडोर ग्रो कर रहे हैं तो पौधों पर स्प्रे करने का सबसे अच्छा समय लाइट बंद होने से 1-2 घंटे पहले या लाइट चालू होने से 1-2 घंटे पहले है, क्योंकि तब पौधे के छिद्र पूरी तरह खुले होते हैं जिससे तेज अवशोषण होता है।

ध्यान रखें कि पौधों को सीधी धूप में फोलियर स्प्रे करना उचित नहीं है, क्योंकि पानी की बूंदों से "लेंस इफेक्ट" बनता है जिससे पत्तियां जल सकती हैं और पोषक तत्व या अन्य पदार्थ खराब हो सकते हैं।
3. आपको कब फोलियर स्प्रे करना चाहिए
जैसा कि बताया गया, फोलियर फीडिंग भूमि पर पोषक डालने का विकल्प नहीं है लेकिन कुछ परिस्थितियों में यह ज्यादा फायदेमंद हो सकती है और इसके तीन प्रमुख कारण हैं।
पोषक तत्वों का सीमित अवशोषण
जब जड़ों के जरिए पोषक तत्वों का अवशोषण किसी वजह से कम हो जाता है (जैसे मिट्टी का pH असंतुलित, तापमान स्ट्रेस, ज़्यादा/कम नमी, जड़ों में बीमारी या कीट आदि), तब फोलियर फीडिंग दी जा सकती है।
उदाहरण के लिए, अगर मिट्टी का pH बहुत ज्यादा या बहुत कम है तो उसमें पोषक तत्वों की उपलब्धता घट जाती है, ऐसे में फोलियर फीडिंग तब तक सहायक है, जब तक pH ठीक न हो जाए।
पोषक तत्वों की कमी
फोलियर स्प्रे पोषक तत्वों की कमी को दूर करने का तेज तरीका है, जैसा बताया गया, पत्तियों से पोषक अवशोषण 95% तक हो सकता है, जो जड़ों से 8-9 गुना ज्यादा है, इसलिए यह जल्दी (हालांकि अस्थायी) समाधान है।

फोलियर फीडिंग स्टिम्युलेंट्स और ग्रोथ बूस्टर
जैसा बताया गया, फोलियर फीडिंग को नियमित फीडिंग का विकल्प नहीं बनाना चाहिए, लेकिन तेज अवशोषण की वजह से यह ग्रोथ स्टेज के अनुसार पौधों को विशिष्ट पोषक तत्व या विटामिन देने का सबसे तेज और असरदार तरीका है। मैक्रो और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स के अलावा, ग्रोथ बूस्टर पत्तियों और शाखाओं की सेहत बेहतर करेंगे और आपकी पौध का उत्पादन, ताकत और गुणवत्ता भी बढ़ाएंगे।
फोलियर स्प्रे कीट और फफूंदी के लिए
स्पाइडर माइट्स और पाउडरी मिल्ड्यू जैसी बीमारियों और कीटों से निपटने के लिए फोलियर स्प्रे सबसे अच्छा तरीका है। नीम तेल बहुत लोकप्रिय है, जो प्राकृतिक, इलाज और रोकथाम, दोनों के लिए असरदार है और इसमें एंटी-फंगल गुण भी होते हैं।
कई ग्रोअर्स नीम ऑयल या ऐसे अन्य उत्पादों को एलोवेरा जूस और एमल्सीफायर (जैसे पोटेशियम सिलिकेट) के साथ मिलाते हैं ताकि तेल घुल जाए और पौधे आसानी से अवशोषित करें; वेजिटेटिव स्टेज में हफ्ते में एक बार इस तरह घोल का छिड़काव पौधों को अधिक मजबूत बना सकता है, लेकिन फूल आने की अवस्था में इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे कलियों (बड्स) का स्वाद और खुशबू प्रभावित हो सकते हैं।
इसी तरह, पोटैशियम साबुन जैसे कीटनाशी साबुन के साथ तैयार फोलियर स्प्रे खतरनाक कीटों को हटाने का बेहतरीन तरीका है, खासकर एफिड्स (लाही) के विरुद्ध। यानी अगर आप अलग-अलग उत्पाद मिलाकर स्प्रे बनाते हैं (जैसे नीम तेल और पोटैशियम साबुन), तो कीट हटाने और भविष्य के हमलों को रोकने में यह और भी असरदार हो सकता है।
ध्यान रखें कि नीम तेल और पोटैशियम साबुन पर ही आप सीमित नहीं हैं; काली मिर्च, दालचीनी का तेल, और लहसुन जैसे कई प्राकृतिक तत्त्व हैं जो रोगजनकों और कीटों से लड़ सकते हैं। अगर अपनी खुद की मिक्स तैयार न करना चाहें, तो लोकल ग्रो शॉप से प्राकृतिक घोल ले सकते हैं।
4. फोलियर स्प्रे के सीमित लाभ
अब जब आप सही समय और तरीका जान गए हैं, तो अब उसकी सीमाएं जानना जरूरी है, क्योंकि त्रिवगति और शक्तिशाली अवशोषण के बावजूद, फोलियर स्प्रे के नुकसान भी हैं:
सीमित पोषक मात्रा
फोलियर स्प्रे से पौधों को पूरी पोषक मात्रा नहीं मिलती, इसलिए आपको मिट्टी में पोषक घोल डालना जरूरी है ताकि आवश्यक पोषक तत्व पूरे मिल सकें।
लीफ बर्न (फाइटोटॉक्सिसिटी)
तीव्र पोषक घोल को स्प्रे करने पर पानी के वाष्पीकरण के बाद पोषक तत्व पत्तियों पर बच सकते हैं, जिससे पत्तियां जल सकती हैं।
लागत और विधि
लीफ बर्न से बचने के लिए छोटे पोषक डोज को बार-बार स्प्रे करना होगा, जो परेशान करने वाला और नियमित फीडिंग से महंगा है।
5. कौन-सा स्प्रेयर इस्तेमाल करें?
फोलियर स्प्रे के लिए दो मुख्य प्रकार के स्प्रेयर्स होते हैं जो परिस्थितिजन्य अनुसार उपयोगी हैं। पहला है नॉर्मल हैंड स्प्रेयर, जो आमतौर पर हर जगह मिल जाता है और 500ml से 11L घोल रख सकता है। यह छोटे व सटीक छिड़काव के लिए उपयुक्त है।
दूसरा है पंप स्प्रेयर, जो ढूँढने में थोड़ा मुश्किल पर बेहतर है क्योंकि इसमें “स्प्रेयर वैंड” होता है जिससे पौधों के चारों ओर आसानी से स्प्रे किया जा सकता है।

असल में कोई एकल सर्वोत्तम स्प्रेयर नहीं है। सबसे अच्छा तरीका दोनों स्प्रेयर्स जरूर रखें; कभी बड़ी संख्या में पौधों के लिए पंप स्प्रेयर चाहिए तो कभी सिर्फ कुछ पौधों के लिए छोटे हैंड स्प्रेयर चाहिए, तो दोनों पास हों तो बेहतर रहेगा।
सालों तक अलग-अलग स्प्रेयर्स से फोलियर स्प्रे का अनुभव लेने के बाद, हम आत्मविश्वास से कह सकते हैं कि लगभग हर स्थिति में पंप स्प्रेयर ज्यादा अच्छा काम करता है और ग्रोअर का जीवन आसान बनाता है। ऐसे स्प्रेयर किसी भी गार्डन स्टोर, हार्डवेयर स्टोर, ऑनलाइन या हाइड्रोपोनिक स्टोर में आसानी से मिल जाते हैं। ये बहुत सस्ते होते हैं और फोलियर स्प्रे का काम बेहद सरल बना देते हैं। आप भी एक ले आएं और सुनिश्चित करें कि उसमें स्प्रे वैंड है (पूरे पौधे पर ढंग से स्प्रे करने के लिए)। आप निश्चित रूप से पछताएंगे नहीं।
6. घर पर बनाएं फोलियर स्प्रे रेसिपी
अगर आप खर्च से बचना चाहते हैं लेकिन फोलियर स्प्रेइंग और फीडिंग के लाभ उठाना चाहते हैं तो यहाँ कुछ प्राकृतिक घरेलू रेसिपी हैं जिन्हें आप आजमा सकते हैं:
प्राकृतिक ग्रोथ स्टिम्युलेंट रेसिपी
इस प्राकृतिक ग्रोथ स्टिम्युलेंट के लिए आपको चाहिए:
| सामग्री | |
|---|---|
| 10 ग्राम केल्प मील | 0.5 ग्राम लिक्विड सिलिका (वैकल्पिक) |
| 5 ग्राम एलोवेरा जूस | 5-10 ग्राम अल्फा-अल्फा मील (वैकल्पिक) |
10 ग्राम केल्प मील को 1 लीटर पानी में 3-5 दिन तक भिगोएँ; इसमें लगभग हर मैक्रो और माइक्रोन्यूट्रिएंट, और ऑर्गेनिक PGR होते हैं। 3-5 दिन बाद 5 ग्राम एलोवेरा जूस मिलाएँ (सर्फेक्टेंट वर तौर पर), इसमें पोषक तत्व भी हैं। अच्छे से मिलाएँ और स्प्रे करने के लिए तैयार है।
आप 0.5 ग्राम लिक्विड सिलिका भी मिला सकते हैं जो सेल वॉल्स को मजबूती देगा। अल्फा-अल्फा मील भी अच्छा है क्योंकि इसमें ट्रायकॉन्टानोल नामक ग्रोथ स्टिम्युलेंट होता है। इस रेसिपी का प्रयोग लाइट बंद होने के समय करें और प्री-फ्लावरिंग के 2-3 हफ्ते पहले रोक दें।
प्राकृतिक कीटनाशक रेसिपी
अगर कीटों का हमला हो या रोकथाम के लिए, ये बहुत बढ़िया रेसिपी है; आपको चाहिए:
- 100% प्राकृतिक नीम तेल;
- पेपरमिंट कास्टाइल साबुन या कोई ऑर्गेनिक कीटनाशी साबुन;
- गुनगुना पानी।
स्प्रेयर में 1 लीटर गुनगुना पानी डालें, 0.6-1 मिली कास्टाइल साबुन मिलाएँ, फिर 1 टीस्पून नीम ऑयल डालकर अच्छे से मिलाएँ और शेक करें। अगर कीट हैं तो हफ्ते में एक बार स्प्रे करें; रोकथाम के लिए हर 2 हफ्ते छिड़कें, बड्स पर स्प्रे न करें।
प्राकृतिक फफूंदनाशक रेसिपी
अगर फफूंदी हटानी है, ये चाहिए:
| सामग्री | ||
|---|---|---|
| 1 लीटर गुनगुना पानी | 1 मिली रोजमेरी ऑयल | 3.5 मिली 100% नीम ऑयल |
| 0.6-1 मिली कास्टाइल साबुन | 1 मिली पेपरमिंट ऑयल | 3.5 मिली जैतून या बादाम तेल |
प्रक्रिया वही है, बस अतिरिक्त सामग्री है। सबसे पहले पानी और साबुन मिलाएँ, फिर रोजमेरी, पेपरमिंट, नीम और जैतून/बादाम तेल मिलाएँ और अच्छे से शेक करें।
इसी तरह फफूंदी के लिए 7 दिन में एक बार, रोकथाम के लिए 14 दिन में एक बार छिड़कें, बड्स पर स्प्रे बिल्कुल न करें। रोजमेरी या पेपरमिंट ऑयल, जैतून/बादाम तेल जरूरी नहीं, न हों तो पहले वाली कीटनाशक रेसिपी असरदार रहेगी।
7. फोलियर स्प्रे की एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए टिप्स
कई कारक फोलियर फीडिंग की एफिशिएंसी प्रभावित करते हैं, तो इन बिंदुओं का ध्यान रखें:
सर्फेक्टेंट न भूलें
सर्फेक्टेंट यानी "वेटर" ऐसी चीजें हैं जो घोल को पत्ती की सतह पर टिकने और फैले रहने में मदद करती हैं, ताकि आप अपना उत्पाद बेकार न करें। फोलियर स्प्रे के लिए कीटनाशी साबुन सबसे उपयुक्त है। (डिश वॉश या कपड़े धोने वाला साबुन न डालें, इससे फसल खराब हो सकती है)।
कीटनाशी साबुन क्या है? यह आम या घरेलू घोल होता है जिसे फोलियर स्प्रे में मिलाकर कीटों से बचाव या इलाज किया जा सकता है। ये स्पाइडर माइट, मेलीबग, एफिड्स, व्हाइटफ्लाई आदि का प्रभावशाली नियंत्रण है। साबुन की वसा अम्ल की वजह से यह कीड़ों की बाह्य त्वचा को सुखाकर निर्जलीकरण और कोशिका नष्ट करता है। शुद्ध कास्टाइल साबुन (जैसे Dr. Bronners) यहाँ ठीक रहेगा। 3 टेबलस्पून साबुन, 1 गैलन RO या डिस्टिल्ड वॉटर, और 1 टेबलस्पून वेजिटेबल ऑयल मिलाएँ और शेक करें, आपका खुद का कीटनाशक साबुन तैयार।
दिन का सबसे सही समय चुनें
बहुत ज्यादा गर्म या ठंडे में स्प्रे न करें; सीधी धूप में स्प्रे न करें और तापमान का जरूर ध्यान रखें, कभी भी 26°C से ऊपर न करें
गर्मी में पत्तियों के छिद्र बंद रहते हैं, और अधिक ठंड में फफूंदी बनने की संभावना रहती है, इसलिए लाइट ऑन/ऑफ से थोड़ी देर पहले करें; स्प्रे के बाद पंखा भी 1-2 घंटे बंद कर दें तो अवशोषण बेहतर होता है।
बाहर ग्रो करते हैं तो बारिश या तेज हवा में स्प्रे न करें, वरना स्प्रे घुल जाएगा।

सही ड्रॉपलेट साइज़ में स्प्रे करें
मध्यम आकार की ड्रॉपलेट वाली नोजल चुनें ताकि ज्यादा क्षेत्र कवर हो। ड्रॉपलेट 100 माइक्रोन से छोटे या 175 माइक्रोन से बड़े न हों। अच्छे क्वालिटी वाले गार्डन स्प्रेयर लें, जिसमें एडजस्टेबल ड्रॉपलेट साइज हो।
स्प्रे वॉल्यूम महत्वपूर्ण है
स्प्रे वॉल्यूम पोषक अवशोषण को प्रभावित करता है, तो छाननी की तरह पूरे कैनोपी पर स्प्रे करें, ध्यान रहे कि घोल पत्तियों से टपके नहीं।
हमेशा मैन्युफैक्चरर के निर्देशों का पालन करें
कुछ बाज़ार में बिकने वाले उत्पाद दूसरों से ज्यादा सुरक्षित होते हैं, इसलिए निर्देशों का पालन करें। गलब्स, मास्क और आई प्रोटेक्शन व जरूरत हो तो पहनें। कुछ उत्पाद खाद्य के लिए सुरक्षित नहीं होते, इसलिए अपने उत्पाद की सुरक्षा की पुष्टि करें।
फोलियर स्प्रे घोल का pH एडजस्ट करें
फोलियर स्प्रे का pH पोषक घुलनशीलता और अन्य तत्त्वों के साथ प्रतिक्रिया को प्रभावित करता है, इसलिए इसका pH जरूर एडजस्ट करें। मिट्टी वाले ग्रो में फीड वॉटर और स्प्रे का pH 6.0-7.0, कोको में 5.5-6.5, और पूरी हाइड्रो खेती में 5.8-6.2 रखें। ग्रोथ स्टेज के अनुसार थोड़ा ऊपर-नीचे संभव है, अधिक जानकारी के लिए नीचे गाइड देखें।
8. पारंपरिक सिंचाई: विस्तार से
तो ये रहा फोलियर फीडिंग (और फोलियर कीटनाशी स्प्रे) की पूरी जानकारी। लेकिन साधारण, रोजाना की फीडिंग का क्या? जैसे पुराना वॉटरिंग कैन वाला तरीका? क्या फोलियर ही करना चाहिए या दोनों का कॉम्बिनेशन? या सिर्फ पारंपरिक सिंचाई?
फोलियर फीडिंग vs पारंपरिक सिंचाई
यह कहना गलत है कि आपको सिर्फ एक तरीका चुनना चाहिए। हर ग्रोअर को अपनी स्थिति के अनुसार तय करना चाहिए कि उसके पौधों के लिए क्या बेहतर है।
फिर भी, पारंपरिक सिंचाई बनाम फोलियर फीडिंग में दोनों के अपने फायदे और नुकसान हैं, तो चलिए जानते हैं किसे चुनना चाहिए।
पारंपरिक सिंचाई: फायदे
सबसे बड़ी बात – कोई फर्क नहीं पड़ता आपकी फोलियर फीडिंग कितनी असरदार है, रूट जोन को पानी देना ही पड़ेगा। बिना इसके पौधे को पूरा पोषण मिलना संभव नहीं। यह आसान तरीका है, कम समय लेता है और सिंचाई को आसान बनाता है। लॉक लग जाए तो भी आसानी से मिट्टी की नमी और पानी की मात्रा को मॉनिटर कर सकते हैं।
हाइड्रो ग्रोअर्स के लिए जड़ों को सीधा पोषक घोल देना आसान है, जो फोलियर फीडिंग से संभव नहीं।
पारंपरिक सिंचाई: नुकसान
पर यह तरीका भी पूरी तरह सही नहीं। पौधों को सही पानी-पोषक देना मुश्किल है, खासकर नए ग्रोअर्स के लिए। ओवरवॉटरिंग जरूरी पोषक तत्वों को बहा सकती है, और जड़ों को ऑक्सीजन की कमी भी हो सकती है। शुरू में पौधों की संख्या सीमित (6) रखकर अनुभव लें।

अतिरिक्त पानी पोषक तत्व बहा सकता है, और जड़ें भी डूब सकती हैं। हाइड्रोपोनिक्स जैसे मिट्टी रहित तकनीकों में ये समस्या ज्यादा हो सकती है लेकिन कंट्रोल और भी आसान रहता है। बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन में समय व श्रम बढ़ सकता है।
कैनबिस की खेती बहुत संवेदनशील है, तो नई चीजें आजमाने, सीखने और अनुभव लेने से न डरें।
समाधान: दोनों का संयोजन!
अगर आप बेहतरीन परिणाम, भारी यील्ड और प्रबल पोटेंसी चाहते हैं, तो दोनों तरीकों का संयोजन सबसे अच्छा है। इस तरह जड़ों से लगातार पोषण और पत्तियों से सप्लीमेंट, दोनों मिलेंगे। अधिकांश फीड शेड्यूल में परंपरागत रूट फीडिंग ही उपयोग करें, लेकिन जब ज़रूरत लगे तब फोलियर स्प्रे हैल्थ बूस्टर के रूप में जोड़ें।

स्प्रे बॉटल लें, पौधों के ऊपर 2-3 बार स्प्रे करें, इससे सभी पत्तियों को ताजे पोषक मिलेंगे और वे स्वस्थ रहेंगी। कहीं कमी दिखे तो 2-3 दिन फोलियर स्प्रे करके जल्दी सही कर सकते हैं।
क्या कोई तरीका फोलियर फीडिंग के लिए ज्यादा उपयुक्त है?
नहीं, सच में ऐसा नहीं है। अगर आप शुरुआत कर रहे हैं तो पूरी तरह हाइड्रोपोनिक से बचें। सेटअप मुश्किल और लागत वाला है, और गलती की संभावना ज्यादा है।
ऑर्गेनिक पसंद है तो कैनबिस मिट्टी लें (या खुद तैयार करें)। अगर अच्छा बैलेंस चाहिए तो कोको-कोयर ट्राई करें – यह दोनों (रूट फीडिंग और फोलियर फीडिंग) के लिए परफेक्ट है। कोको-जड़ों को स्ट्रक्चर देने के साथ पौधे को जरूरी पोषक और ऑक्सीजन, दोनों देता है, साथ ही ग्रोथ अच्छी मिलती है।
9. फोलियर फीडिंग शॉर्ट FAQs
कैनबिस फसल में फोलियर फीडिंग क्या है?
सादा भाषा में कहें तो पौधे को स्प्रे के रूप में पोषक देना, जिससे पत्तियों के स्टोमाटा (छिद्र) खुलते हैं और पौधे को सीधा पोषण मिलता है।
रूट जोन वॉटरिंग पर फोलियर स्प्रे करने के फायदे
फोलियर फीडिंग के कुछ फायदे हैं - पोषक की कमी तुरंत ठीक करना, रूट जोन की कुछ समस्याओं (जैसे pH लॉक, नमक जमाव) में सीधे पत्तियों को पोषण देना, कम अपशिष्ट होना और पौधे की ऊर्जा की बचत।
फोलियर फीडिंग से रूट जोन को बायपास करके सीधे पोषक पहुँचाया जा सकता है। इससे वेस्टेज कम, पौधों को जल्दी पोषण मिलता है और पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है।
क्या फोलियर फीडिंग नियमित रूट फीडिंग का विकल्प बन सकती है?
सिद्धांत रूप में हाँ, पर प्रैक्टिकली यह मुश्किल और वक़्त लेने वाला है - फोलियर फीडिंग में ज्यादा मेहनत लगती है। इसलिए इसे सिर्फ सप्लीमेंट के रूप में प्रयोग करें।
फोलियर फीडिंग का सही समय कौन सा है?
ओपन गर में - सुबह जल्दी या शाम देर से, इंडोर में - लाइट बंद होने के बाद 30 मिनट या चालू होने के 1-2 घंटे पहले। लाइट ऑन से पहले पौधों को फीड वाटर अवशोषित करना चाहिए। सबसे गरम वक्त या लाइट ऑन रहते स्प्रे न करें, वरना पौधे जल सकते हैं व ग्रोथ घट सकती है।
फोलियर फीडिंग का सही तरीका क्या है?
तीन बिंदु:
- पूरे पौधे को कवर करें, लेकिन ज्यादा टपकाएं नहीं।
- जितना हो सके महीन स्प्रे करें (अच्छा गार्डन स्प्रेयर लें)।
- हो सके तो पौधों को ग्रो टेंट या एरिया से बाहर फोलियर स्प्रे करें।
फोलियर फीडिंग में क्या "न करें"?
लाइट ऑन रहते स्प्रे, सस्ता स्प्रेयर, या फूल उगने के अंतिम 3 हफ़्तों में फोलियर फीडिंग न करें।
- फूलों में अंतिम 3 सप्ताह में फोलियर फीडिंग न करें। वर्ना फ्लशिंग में दिक्कत, फ्लेवर खराब हो सकता है। फूलों (कलियों) पर स्प्रे बिल्कुल न करें।
- फीड स्प्रे की ताकत का ध्यान रखें। जरूरत से ज्यादा डोजर्स न दें। छोटे पौधों के लिए 25%, बड़े पौधों के लिए 50% डोज से शुरू करें।
- फोलियर फीडिंग से बढ़ी ह्यूमिडिटी के लिए हैंड हाइग्रोमीटर रखें, ज्यादा ह्यूमिडिटी से कई समस्याएँ हो सकती हैं।
10. निष्कर्ष
अपने कैनबिस पौधों को फोलियर स्प्रे करना फफूंदी, कीट और रोगों से निपटने का अच्छा तरीका है, और छोटी पोषक कमियों को सही करने में भी मददगार है। ध्यान रखें, पौधों को पोषण देने का सर्वोत्तम तरीका मिट्टी में पानी देना है, फोलियर फीडिंग सिर्फ कम्प्लीमेंट या पौधों को बूस्ट देने के लिए इस्तेमाल करें ताकि घने और रेजिन्स से भरपूर बड्स मिल सकें। अगर आपके पास कोई घरेलू फोलियर स्प्रे रेसिपी हो तो नीचे कमेंट में जरूर शेयर करें, ताकि बाकी ग्रोअर्स को भी फायदा हो!
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